Franchise Business Plan फ्रेंचाइजी: बनें खुद के बॉस


*फ्रेंचाइजी: बनें खुद के बॉस*


फ्रेंचाइजी एक ऐसा काम है, जिसमें आप नामी कंपनियों के उत्पाद को अपने शो-रूम या दुकान में बेचते हैं और उस कंपनी की साख के हिसाब से मुनाफा कमा सकते हैं। आप भी फ्रेंचाइजी ले सकते हैं।


अगर आप खुद के बॉस बन जाएं तो कैसा लगेगा..? यदि मन में कुछ आशाएं कुलांचे भरने लगी हैं और खुद का बॉस बनने का सपना आकार लेने लगा है तो फ्रेंचाइजी इंडस्ट्री में हाथ आजमाने के लिए तैयार हो जाएं। फ्रेंचाइजी का मतलब है किसी नामी कंपनी के नाम का इस्तेमाल करके उसका सामान बेचना या उसी नाम से व्यापार करना।

यह एक ऐसा काम है, जिसे छोटे शहरों, कस्बों, यहां तक कि दूर-दराज के गांवों में भी शुरू किया जा सकता है। गांवों और छोटे कस्बों में आप किसान कॉल सेंटर और कम्प्यूटर ट्रेनिंग सेंटरों की फ्रेंचाइजी ले सकते हैं तो छोटे और बड़े शहरों में खाने-पीने और शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य से जुड़ी कम्पनियों की फ्रेंचाइजी ले सकते हैं। बस एक छोटा- सा निवेश आपको आसमान की बुलंदी तक ले जा सकता है।

*क्या है फ्रेंचाइजी*
बाजार में आजकल खुली प्रतिस्पर्धा और ब्रांडिंग का जमाना है।कम्पनियां अधिक से अधिक ग्राहक अपनी ओर खींचना चाहती हैं। कोई भी फेमस कम्पनी, जिसका नाम बाजार में स्थापित हो चुका होता है, वह कुछ शर्तों के साथ आपको अपने नाम के इस्तेमाल की इजाजत दे देती है। इसके लिए आपको कम्पनी द्वारा बनाए गए नियमों की कसौटी पर खरा उतरना होगा। मशहूर कम्पनी की फ्रेंचाइजी लेने से बाजार में स्थापित होने में समय नहीं लगता।


*कैसे लें फ्रेंचाइजी*
अगर आप फ्रेंचाइजी लेकर अपना काम शुरू करना चाहते हैं तो सबसे पहले इंडस्ट्री का चयन करें। फिर उसमें होने वाले खर्चे का आकलन करें। इस बात के लिए पूरी मार्केट रिसर्च करनी होगी कि किस इंडस्ट्री में किस कंपनी की फ्रेंचाइजी पर कितना पैसा लगाने पर कितना लाभ कमाया जा सकता है।

पूरी तैयारी के बाद कंपनी के फ्रेंचाइजर से मिलें। इंटरनेट पर भी कंपनियों के फ्रेंचाइजी नियमों और उपलब्धता के बारे में जानकारी उपलब्ध रहती है। अगर आप फ्रेंचाइजी कम्पनियों की शर्तों पर खरे उतरे तो आपको आसानी से फ्रेंचाइजी मिल जाएगी। शर्तों पर सहमति के बाद ही आपको किसी कम्पनी की फ्रेंचाइजी मिलेगी।

*कैसे करें कंपनी का चुनाव*
छोटी कम्पनियों की फ्रेंचाइजी 2 लाख से 10 लाख रुपये के बीच उपलब्ध है, इसलिए आप अपनी जेब के अनुसार फ्रेंचाइजी ले सकते हैं। आपको देखना होगा कि आप जिस जगह फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं, वहां आपका काम चल भी पाएगा कि नहीं। कम्पनी की मार्केट वैल्यू आंकने के बाद ही आप उसकी फ्रेंचाइजी लेने का फैसला करें।


*जानकारी प्राप्त करें*
अधिक जानकारी के लिए आप फ्रेंचाइजी प्लस की वेबसाइट www.franchise-plus.com पर संपर्क कर सकते हैं।


*फ्रेंचाइजी कंपनियों की मुख्य शर्तें*
*जगह:*
काम शुरू करने के लिए आपके पास पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
सिक्योरिटी मनी: कंपनियां कुछ सिक्योरिटी मनी रखवाती हैं।
समय: सभी कंपनियों की अलग-अलग शर्तें होती हैं। कुछ कंपनियां निश्चित समयावधि तो कुछ आजीवन के लिए फ्रेंचाइजी देती हैं।

फ्रेंचाइजी के लिए बहुत ज्यादा पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है। बिजनेस की थोड़ी-सी समझ, इसके अलावा जगह, सोशल नेटवर्क और जोखिम उठाने की क्षमता है तो आप इस क्षेत्र में आ सकते हैं।

मार्केट में हर सेक्टर की फ्रेंचाइजी उपलब्ध है। यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस क्षेत्र में हाथ आजमाना चाहते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में जहां मदर्स प्राइड, शेमरॉक स्कूल, किड्स गुरुकुल और बचपन जैसे स्कूल फ्रेंचाइजी दे रहे हैं, वहीं उच्च शिक्षा में इंडियन इंस्टीटूट ऑफ कॉमर्स एंड ट्रेड जैसे संस्थान हैं। कंप्यूटर एजुकेशन के लिए भी एसटीसी टेक्नोलॉजी और एनिमेशन के लिए पिकासो डिजिटल मीडिया जैसे नाम शामिल हैं।
 
खाने-पीने के क्षेत्र में भी फ्रेंचाइजी उपलब्ध है। यहां फूड फैक्ट्री स्लाइस पिज्जा, अंकल फूड प्रोडक्ट्स, विजयनबिज जो एक साउथ इंडियन फूड कॉर्नर है, जे कार्ट हेल्थ एंड लाइफस्टाइल प्रा.लि., बेबे दा ढाबा जैसी कम्पनियां शामिल हैं। इनके अलावा रिटेल के क्षेत्र में किताबों की दुकान बुक कैफे, किड स्पेस, महिलाओं के ब्रांड स्वास्तिक, एक्वेरियम वर्ल्ड शॉप और ज्वेलरी डिजाइनिंग के क्षेत्र से जुड़ी डायागोल्ड जैसी कम्पनियां शामिल हैं।


बहुत छोटी-सी धनराशि से आप बड़ा काम शुरू कर सकते हैं और इसमें जोखिम की संभावना भी कम है। छोटी कम्पनियों की फ्रेंचाइजी 2 लाख से 10 लाख के बीच में मिल जाती है।
केंद्र और राज्य सरकारों की लघु उद्योग से जुड़ी नीतियों में सब्सिडी के साथ लोन की व्यवस्था है। इसके अलावा बैंक भी लोन मुहैया करवाते हैं।

अमेरिकी मार्केट रिसर्च कम्पनी के मुताबिक एशियन फ्रेंचाइजी मार्केट की आय प्रतिवर्ष 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के हिसाब से बढ़ रही है और आने वाले पांच सालों में यह 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाएगी। पिछले तीन-चार सालों में भारत में फ्रेंचाइजी का ट्रेंड 30 से 35 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ा है, इसलिए भविष्य में भी फ्रेंचाइजी मार्केट हॉट रहने की उम्मीद की जा सकती है। 

*मार्केट रिसर्च के बाद ही फ्रेंचाइजी लें*
भारत में इस समय तकरीबन 750 देसी-विदेशी कंपनियों की फ्रेंचाइजियां काम कर रही हैं, जिनमें तीन लाख लोगों को सीधा रोजगार मिला हुआ है। पूरे देश में बन रही 1500 सुपरमार्केट, 500 से भी ज्यादा बन रहे नए मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर इस क्षेत्र के सुनहरे भविष्य को पुख्ता करते हैं। विदेशी कंपनियां भारत के सभी राज्यों में फ्रेंचाइजी मार्केट को बढ़ावा दे रही हैं। भारत में फ्रेंचाइजी का कॉन्सेप्ट अभी नया है और इससे संबंधित सही जानकारी कुछ ही लोगों के पास उपलब्ध है। कंपनियां इसी का फायदा उठा कर अक्सर लोगों को ठगने में कामयाब होती हैं।


विदेशों में फ्रेंचाइजी को लेकर अलग से कानून है, जबकि भारत में अभी इस संबंध में कोई कानून नहीं है। अगर आप भी फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं तो इसके लिए पूरी मार्केट रिसर्च करके इस क्षेत्र में उतरें। इसके लिए आप किसी जानकार व्यक्ति की सलाह भी अवश्य लें। हमारे देश में प्रतिवर्ष फ्रेंचाइजी प्लस एक्सपो लगता है, जहां से जानकारी लेकर आप पूरी तरह आश्वस्त होकर इस काम की शुरुआत कर सकते हैं। भारत में फ्रेंचाइजी का सालाना कारोबार 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा का है।
बेरोजगार युवकों के लिए फ्रेंचाइजी कमाई का एक अच्छा जरिया है। अगर आप कम पैसे और कम जोखिम के साथ फ्रेंचाइजी लेना चाहते हैं तो आपके लिए बिजनेस सर्विस, रिटेल, फाइनेंशियल सर्विस, रियल एस्टेट, ट्रैवल, होटल, मोटल, फूड एंड बेवरेज, लाइफस्टाइल, एजुकेशन, एन्टरटेनमेंट, ऑटोमोटिव, आईटी, हेल्थ और ब्यूटी केयर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां खूब संभावनाएं हैं।
कई कम्पनियां तो अपनी फ्रेंचाइजी कुछ शर्तों सहित मुफ्त देती हैं तो कई के लिए कम्पनियां बदले में कुछ सिक्योरिटी मनी रखवाती हैं।

*सक्सेस स्टोरी/सुशील कुमार नेवा के फ्रेंचाइजी होल्डर, बलिया*
सुशील सामान्य ग्रेजुएट हैं, लेकिन फिर भी वे एक स्मार्ट बिजनेसमैन हैं। पहले वे नौकरी करते थे, लेकिन नौकरी से तंग आकर उन्होंने दुकानदारी की, पर मार्केटिंग के लिए हर महीने दिल्ली-कोलकाता के चक्कर काटते-काटते वे परेशान हो गए तो उन्होंने फ्रेंचाइजी लेने का निर्णय किया।
आज उनके पास कई नामी कम्पनियों की फ्रेंचाइजी हैं। वे कहते हैं कि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि बलिया जैसे छोटे शहर के लोग ब्रांड्स को इतना पसंद करेंगे। फ्रेंचाइजी के लिए पैसे कम थे तो सुशील ने अपने एक दोस्त के साथ मिल कर काम शुरू किया। शुरुआत में उन्हें दो लाख रुपये खर्च करने पड़े। आज उन्हें मार्केटिंग के लिए दिल्ली और कोलकाता की भीड़ भरी जगहों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, बल्कि एक फोन पर ही सारा सामान दुकान में पहुंचता है। वे कहते हैं कि फ्रेंचाइजी से उनकी रोजी-रोटी का स्थाई और पुख्ता जुगाड़ हो गया है। फ्रेंचाइजी के काम में मेहनत तो है, लेकिन पैसा और शोहरत भी हैं। वे गर्व से कहते हैं- आज मैं खुद का मालिक हूं।
यह क्षेत्र कम निवेश और कम जोखिम के साथ बेहतर लाभ देने वाला है। सुशील कहते हैं कि शहरों में फ्रेंचाइजी खोलने के अवसर बड़े पैमाने पर मौजूद हैं। इस क्षेत्र में कम पैसे में बेहतर लाभ कमाया जा सकता है। अब मेरी नजर विदेशी कंपनियों पर है। कई विदेशी कंपनियां भारत में अपने आउटलेट खोलने जा रही हैं और उनकी नजर छोटे शहरों और कस्बों पर भी है। ऐसे में ऐसी कंपनियों से साझा फ्रेंचाइजी लेकर अपना बिजनेस शुरू करना काफी फायदेमंद है। अब ब्रांड्स का जमाना है, इसलिए लोगों की पसंद बदल चुकी है।

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